ज्योतिष की 4 विद्याएं प्रधान हैं
पहला- हस्तरेखा विद्या
दूसरा- नक्षत्र विद्या
तीसरा- अंक विद्या
चौथा- स्वर विद्या
- हस्तरेखा- शरीर के विकास के साथ हस्तरेखा का इतिहास बन जाता है और उस रेखा से व्यक्ति के भविष्य में होने वाली गतिविधियों का संदेश मिलने लगता है.
- नक्षत्र विद्या- देश काल के अनुसार जन्म के समय उदित नक्षत्र का प्रभाव जातक पर पड़ने लगता है उमर बीतने के साथ-साथ भविष्य की गतिविधियों का बोध होने लगता है.
- अंक विद्या- अंक विद्या का संबंध मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक सदा ही बना रहता है और यह अन्य व्यक्तियों के अंक से प्रभावित व्यक्ति से व्यक्तियों की गतिविधियों को प्रभावित करता है.
- स्वर विद्या- स्वर विद्या से व्यक्ति के पूर्व कर्म तथा आगे होने वाले कर्म की जानकारी की जा सकती है.
इन चारों विद्याओं से प्रभावित व्यक्ति अपना हस्तरेखा का निर्माण करते हुए जीवन के अंतिम स्थिति में पहुंचता है अतः हस्तरेखा शास्त्र नृत्य नवीन शास्त्र है व्यक्ति का बाया हाथ उसके जीवन का आरंभिक प्रक्रिया दिखाता है एवं व्यक्ति के दाहिने हाथ की रेखाएं व्यक्ति के भविष्य उन्मुख गतिविधि दिखाती है.
अपना दोनों हाथ का हस्त रेखा चित्र के साथ अपना प्रश्न भेज कर निशुल्क परामर्श प्राप्त कर सकते हैं.
Whatsapp
79033 31354
धन्यवाद

No comments:
Post a Comment