बिहार के साथ हो रहे भेद-भाव के खिलाफ पहले सर गणेश दत्त ने 1928 में इंडियन स्टेटच्यूटरी कमीशन को दिए मेमोरेंडम में इस भेद-भाव के खिलाफ कहा था की खनिज सम्पदा के मामले में शुरू से ही संपन्न रहने के बावजूद बिहार के साथ भेद--भाव किया जाता रहा है |
कोयला और अबरख के उत्पादन में बिहार का योगदान 70 और लोहा के मामले में 90 प्रतिशत है, लेकिन रॉयल्टी 5 प्रतिशत मिलती थी, जो तर्क सांगत नहीं है |
कोयले की कीमत 3 रुपये प्रति टन के हिसाब से बिहार और ओड़िसा में 1 करोड़ 45 लाख टन पर लागाया जाता, तो प्रति वर्ष 22 लाख रूपये बिहार को मिलता |
उनका कहना था की रॉयल्टी की वर्तमान दरें बिहार के हित में नहीं है और उसे बढ़ाना चाहिए था |
कोयला और अबरख के उत्पादन में बिहार का योगदान 70 और लोहा के मामले में 90 प्रतिशत है, लेकिन रॉयल्टी 5 प्रतिशत मिलती थी, जो तर्क सांगत नहीं है |
कोयले की कीमत 3 रुपये प्रति टन के हिसाब से बिहार और ओड़िसा में 1 करोड़ 45 लाख टन पर लागाया जाता, तो प्रति वर्ष 22 लाख रूपये बिहार को मिलता |
उनका कहना था की रॉयल्टी की वर्तमान दरें बिहार के हित में नहीं है और उसे बढ़ाना चाहिए था |

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