जब सर्दियों का मौसम शुरू होता है तभी प्याज की फसल की बुवाई शुरू होती है, आमतौर पर सभी खेत मजदूरों से भरे रहते है, लेकिन अब इन्हें तनख्वाह या वेतन देने के लिए पैसे नहीं है |
भारत के अधिकांश गांव में बैंक नहीं है और इसलिए नकद भारत के इन गांवो के लिए जीवनरेखा है | वो गांव जहाँ एक भी बैंक ब्रांच नहीं है वहां पहुँचने की कोशिश की जा रही है |
Banking Correspondance की योजना बनायी जा रही है, जिसमे ऐसे व्यक्ति नियुक्त किये जायेंगे जो अलग अलग गांवो में जा कर वहां के लोगों को बैंकिंग की सुविधाएं देंगे, जैसे की अगर किसी को खाता खोलना हो या उसमे पैसे जमा करने हो |
लेकिन अगर सबके पास बैंक अकाउंट हो तो भी ये सुविधाएं कैशलेस कैसे हो पाएंगी ! शायद मोबाइल फ़ोन इसकी जवाब है |
गुजरात के ही एक गांव में कोशिश चल रही है ग्राहक अपने मोबाइल फ़ोन से स्थानीय स्टोर वाले को SMS भेज कर वहां से सामान खरीद सकते हैं | ये व्यवस्था एक निजी बैंक और गांव वालों ने मिल कर शुरू की है |
भारत के ग्रामीण इलाकों में मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, मोबाइल कंपनी वाले दूरदराज के इलाकों तक पहुँचने की कोशिश में लगे हुए हैं |

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